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यूपी में बजेगा चुनावी बिगुल

यूपी में चुनाव नजदीक आ चुके हैं और सभी नेताओं ने अपनी कमर कस ली है...लेकिन इस बार चुनाव पिछले चुनाव से अलग है क्योंकि इस बार सभी राजनीति दलों की साख दाव पर होगी और इन दलो में है कईं नेता पुत्र भी है जिनकी साख भी दाव पर है इन नेता पुत्रों में सबसे पहला नाम आता है कांग्रेस के युवराज जो हैं सोनिया गांधी के पुत्र और पार्टी महासचिव राहुल गांधी तो उनके बाद हैं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव. वहीं उनके बाद नम्बर आता है भारतीय जनता पार्टी की सांसद मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी का, राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी, और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह भी इसी लाइन में आते हैं. ये पिछले कुछ साल से उत्तर प्रदेश में अपनी और पार्टी की जमीन मजबूत करने में जुटे हुए हैं..
अगर बात करें राहुल की तो वो आए दिन उत्तर प्रदेश का दौरा करते रहते हैं और उनका यह दौरा हमेशा सुर्खियों में रहता है लेकिन चुनावी मौसम में यदि उनका दौरा हो तो वह बहुत मायने रखता है. हाल ही में प्रदेश का दौरा कर राहुल ने न सिर्फ कांग्रेस का चुनावी शंखनाद किया बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी गरमा दिया.
इसी प्रकार अखिलेश ने क्रांति रथ पर सवार होकर पूरे प्रदेश का भ्रमण किया. सपा से अमर सिंह की विदाई के बाद से ही वह अपनी एक अलग पहचान बनाने में लगे हैं. बहुत हद तक इसमें उन्हें सफलता भी मिली है. राजनीतिक हलकों में अक्सर चर्चा होती रहती है कि राहुल का उत्तर प्रदेश में असली मुकाबला तो अखिलेश से ही होगा.
जयंत राजनीति में अभी नए हैं लेकिन वह युवा है और जोश से लबरेज हैं. वह भी पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में गली-गली और घर-घर घूमकर प्रचार-प्रसार में लगे हैं.
अगर बात करें इन सभी पुत्रों की चाहे राहुल हों या अखिलेश या फिर जयंत और वरुण. सबसे बड़ी साख तो राहुल गांधी की दांव पर है. क्योंकि उन्हें पार्टी के सबसे बड़े चेहरे के रूप में आगे किया गया है. औरो के साथ ऐसा नहीं है. अखिलेश और जयंत की अपेक्षा उनकी पार्टी और पिता की साख कहीं अधिक दांव पर रहेगी. हां, अखिलेश कुछ साल से लगातार मेहनत कर रहे हैं और अपनी पहचान छोड़ने में लगे हैं लेकिन उस स्तर पर नहीं पहुंचे हैं कि उनकी साख दांव पर रहे.
उत्तर प्रदेश चुनाव में राहुल, अखिलेश, जयंत, पंकज पहली बार अपना दमखम और जौहर दिखाएंगे. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे कैसे खुद को साबित करते हैं. क्योंकि आखिर उनकी टक्कर यूपी में सबसे मजबूत पार्टी बीएसपी से जो है.
- नवीन चौहान
अगर बात करें राहुल की तो वो आए दिन उत्तर प्रदेश का दौरा करते रहते हैं और उनका यह दौरा हमेशा सुर्खियों में रहता है लेकिन चुनावी मौसम में यदि उनका दौरा हो तो वह बहुत मायने रखता है. हाल ही में प्रदेश का दौरा कर राहुल ने न सिर्फ कांग्रेस का चुनावी शंखनाद किया बल्कि प्रदेश की राजनीति को भी गरमा दिया.
इसी प्रकार अखिलेश ने क्रांति रथ पर सवार होकर पूरे प्रदेश का भ्रमण किया. सपा से अमर सिंह की विदाई के बाद से ही वह अपनी एक अलग पहचान बनाने में लगे हैं. बहुत हद तक इसमें उन्हें सफलता भी मिली है. राजनीतिक हलकों में अक्सर चर्चा होती रहती है कि राहुल का उत्तर प्रदेश में असली मुकाबला तो अखिलेश से ही होगा.
जयंत राजनीति में अभी नए हैं लेकिन वह युवा है और जोश से लबरेज हैं. वह भी पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में गली-गली और घर-घर घूमकर प्रचार-प्रसार में लगे हैं.
अगर बात करें इन सभी पुत्रों की चाहे राहुल हों या अखिलेश या फिर जयंत और वरुण. सबसे बड़ी साख तो राहुल गांधी की दांव पर है. क्योंकि उन्हें पार्टी के सबसे बड़े चेहरे के रूप में आगे किया गया है. औरो के साथ ऐसा नहीं है. अखिलेश और जयंत की अपेक्षा उनकी पार्टी और पिता की साख कहीं अधिक दांव पर रहेगी. हां, अखिलेश कुछ साल से लगातार मेहनत कर रहे हैं और अपनी पहचान छोड़ने में लगे हैं लेकिन उस स्तर पर नहीं पहुंचे हैं कि उनकी साख दांव पर रहे.
उत्तर प्रदेश चुनाव में राहुल, अखिलेश, जयंत, पंकज पहली बार अपना दमखम और जौहर दिखाएंगे. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे कैसे खुद को साबित करते हैं. क्योंकि आखिर उनकी टक्कर यूपी में सबसे मजबूत पार्टी बीएसपी से जो है.
- नवीन चौहान
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